तीन तहसीलो के 92 गावों में नर्मदा से आएगी खुशहाली

तीन तहसीलो के 92 गावों में नर्मदा से आएगी खुशहाली :-

                                                                                           माँ नर्मदा के दर्शन मात्र से सुख – शांति का अनुभव होता है ,तो कल्पना कीजिये की जब नर्मदा का मीठा जल 92 गावों के २२ हज़ार हैक्टर क्षेत्र में पहुंचेगा ,तब जिले की तीन तहसीलो के एक लाख किसान परिवारो के जीवन में कितनी खुशहाली आएगी।यह सब संभव होगा 515 करोड़ रू. की लागत वाली  नर्मदा उद्धहन सूक्ष्म सिंचाई परियोजना की बदौलत ,जिसे अगले साल के अंत तक पूर्ण करने का लक्ष्य है.

लम्बा संघर्ष  – उल्खनीय है की क्षेत्र के किसानों की यह बहुप्रतिक्षित मांग लम्बे संघर्ष  के बाद पूरी हुई थी ,लेकिन अभी भी गति धीमी ही है, नर्मदा उद्धहन सूक्ष्म सिचाई परियोजना की स्वीकृति  31 जुलाई 2016 की मिली थी। जिसकी आधारशिला मुख़्यमंत्री श्री मिली थी ,जिसकी आधारशिला मुख़्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने ररखी थी। इस पारी योजना का निर्माण कार्य  इंदिरा सागर परियोजना के अधीन दिसंबर 2016 में शुरू हुआ। इस परियोजना से 22 हज़ार हैक्टर क्षेत्र सिंचित होगा।तीन तहसीलो गोगावां ,भगवान और खरगोन के करीब एक लाख कृषक परिवार लाभान्वित होंगे। 

देरी की वजह – मेसर्स H.C.C. और L. C. E. S. P. L. J.V. मुंबई नामक इन दो को कम्पनीओ ने शासन से अनुबंध के मुताबिक  14 जून 2019 तक कार्य पूर्ण होना था ,लेकिन 2018 में विधान सभा चुनाव फिर 2019 में लोक सभा चुनाव में प्रासकीय अधिकारी और अभियांत ओ के संग्लन होने से विलम्ब हुआ। कुशल श्रमिको की कमी और कोरोना के कारण भी चार माह निर्माण कार्य बंद  रहा। इसके पूर्व नहर निर्माण संघर्ष समिति को पर्यावरणीय स्वीकृति भी अध्यक्ष श्री दामोदर अग्रवाल के प्रयासों से लोक अदालत की शरण में जाने के बाद मिली। अनुबंधित कोम्पनिओ को 14 जून 2021 तक इनके टनल शुरू करना है। 

किसानों को उम्मीद –    क्षेत्र के किसानों श्री पवन रामल्या नागझिरी ,श्री धर्मेंद्र यादव गोगावां श्री राजेश मंडलोई बिस्टान और श्री ओमप्रकाश गुप्ता घूघरिया खेड़ी का कहना है,की निश्चित समयावधि में नहर का निर्माण कार्य पूरा नहीं होने से 92 गांव के किसान प्रभवित हो रहे है,इन्हे उमीद है, की सब कुछ ठीक ठाक रहा तो अगले वर्ष के अंत इस सूखे क्षेत्र में नर्मदा जल से खुशहाली आ जाएगी। 
                                                                                                                    श्री K. S रावत , SDO,इंदिरा  सागर नहर परियोजना ने कृषक जगत को बताया की परियोजना में विलंभ होने का प्रमुख कारण पर्यावरण में विलम्भ होने का प्रमुख कारण पर्यावरण स्वीकृति देरी से मिलना रहा है ,हमारी कोशिश है ,की अगले वर्ष के अंत तक सभी स्वीकृत  92 गावों के सभी किसानों को नर्मदा जल मुहैया करवाएं। देरी के चलते  विभाग ने दूसरे एजेंडे से 17 करोड़ रु. स्वीकृत किये हैं ,इस परियोजना को अतिशीघ्र पूर्ण करना हमारा लक्ष्य है।  

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