फसलों को पाले से बाचव के लिए वैज्ञानिकों की सलाह

फसलों को पाले से बाचव के लिए वैज्ञानिकों की सलाह:-

कृषि विज्ञान केन्द्र ,टीकमगढ  के वरिष्ठ वैज्ञानिक  एवं प्रमुख डॉ. बी. एस. किरार  के निर्देशन  में डॉ। आर.के प्रजापति,  डॉ.आई,डी. सिंह एवं जयसवाल छिगारहा के द्वारा काटी ,हसगोरा,एव नंदनपुर  जलवायु समउत्थानसील परियोजना अंगीकृत गावों में किसानो की फसलों का निरीक्षण किया एवं कृषि संबंथित तकनीकी जानकारी दी। पाले से बचाव के लिए किसान भाईयो को खड़ी फसल पर २५ ग्राम ग्लूकोज प्रति पंप (१५ ली. पानी )की दर से छीड़ काव करना चाहिए अथवा एन.पी.के (१८:१८:१८ अथवा  १९:१९ :१९ अथवा २०:२०:२० )१०० ग्राम २५ ग्राम एग्रोमिन प्रति पंप की दर से पाला प्रभवित फसल पर छीड़काव करे। म्यूरेट ऑफपोटाश 150 ग्राम प्रति पम्प (१५. लीटर पानी )अथवा 1.5 kilogram प्रति एकड़ की दर से 150 लीटर पानी के साथ  छीड़काव करे। इस समय चने की इल्ली का प्रकोप देखा गया।  इसके नियंत्रण के लिए प्रांरभिक अवस्था में इल्ली छोटी होने पर जैविक कीटनाशक  विबेरिया बेसियान ४०० मिली प्रति एकड़ या एन.पी.व्ही. १०० गिडार प्रति एकड़ १५०-२०० लीटर पानी में गोल बनाकर छीड़काव करे। 

इल्ली की सख्या बढ़ने पर इंडोक्साकार्ब  १५० ग्राम या इमामेकिटन बेन्जोएट ५ एस.जी. 80 ग्राम या प्रोफेनोफ्राँस ४०० मिली प्रति एकड़ २०० लीटर पानी की दर  से घोल बनाकर छिड़काव करे। कटुआ  कीट दिन में ढेला में छिपा रहता है.और रात का पौधे को जम्मीन की सतह से काटकर नुकसान पहुँचता है। इसके नियत्रण के लिए  खड़ी  फसल में डेल्टामैथ्रिन २.८ ई.सी. 300 मिली या किन्नालफ्रांस २५ ई.सी. ३०० मिली या ४००  मिली प्रति एकड़ की दर  घोल बनाकर छिड़काव करे। सरसों की फसल में माहु कीट के प्रति निगरानी करते रहे और  माहु कीट फसल में आने पर उसमे कीटनाशक दवा  इमि डाक्लोप्रिड 17. 8 प्रतिशत की 7 मिली मात्रा को 15 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करे।   

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