मटर की खेती करने की जानकारी !


मटर की खेती करने की जानकारी

                                                      मटर की खेती प्रमुखतः मध्यप्रदेश में सिहोर, पन्ना दमोह, सागर, सतना, रायसेन, टीकमगढ़, दतिया, इंदौर , देवास, भोपाल ,उज्जैन,ग्वालियर, मण्डला जिलों में की जाती है । मटर की खेती सब्जी और दाल के लिये उगाई जाती है। मटर  की आवश्यकता की पूर्ति के लिये पीले मटर का उत्पादन करना अति महत्वपूर्ण है, जिसका प्रयोग दाल, बेसन एवं छोले के रूप में अधिक किया जाता है । मटर एक दलहनी फसल है जिसकी अगेती खेती करके आप अच्छी खासी कमाई कर सकते हैं. सितंबर महीने के आखिरी सप्ताह या अक्टूबर के पहले सप्ताह में इसकी बुवाई की जा सकती है. सबसे अच्छी बात यह है कि मटर की अगेती फसल महज 50 दिन में तैयार हो जाती हैइसके चलते मटर की खेती के बाद अन्य फसल भी समय रहते की जा सकती है, तो आइए जानते हैं मटर की अगेती खेती की पूरी जानकारी

जलवायु एवं मिट्टी जानकारी जाने :- कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार मटर की खेती के लिए मटियार दोमट और हल्की दोमट मिट्टी अति उत्तम होती है. इसकी खेती  लिए  मिट्टी का पीएच मान 6 से 7.5 होना चाहिए. जबकि बीज के अंकुरण के लिए तापमान 22 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए, जबकि  मटर की अच्छी पैदावार के लिए तापमान 10 से 18 डिग्री सेल्सिस उत्तम  माना गया है. बता दें कि अम्लीय मिट्टी की जमीन मटर की खेती के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती है. ऊसर भूमि में भी इसकी खेती नहीं की जा सकती है.

भूमि की तैयारी कैसे करे जाने –
                                         खेत तैयार करने के लिए सबसे पहले खेत की जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें. इसके बाद दो-तीन बार कल्टीवेटर से खेत की जुताई करें. वहीं प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मटर की खेती के लिए 20 टन सड़ी गोबर की खाद, 70 किलोग्राम फास्फोरस, 25 किलो नाइट्रोजन और 50 किलोग्राम पोटाश उपयुक्त होता है. मटर की अच्छी पैदावार लेना चाहते हैं तो नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों का उपयोग कम से कम करना चाहिए. इसके अधिक उपयोग से स्थिरीकरण और गांठों का विकास ठीक से नहीं हो पाता है. वहीं प्रति हेक्टेयर 90 से 100 किलोग्राम बीज की जरुरत  होती है. बता दें बुवाई से पहले मटर को बीज जनित रोगों से बचाव के लिए अनुशंसित कीटनाशक से शोधन करना चाहिए.भूमि का चुनाव: मटर की खेती सभी प्रकार की भूमियों में की जा सकती है परंतु अधिक उत्पादन हेतु दोमट और बलुई भूमि जिसका पी.एच.मान. 6-7.5 हो तो अधिक उपयुक्त होती है।

सबसे अच्छी बात यह है कि मटर फसल की एक ऐसी हे जो की महज 50 दिन में तैयार हो जाती है. इसके चलते मटर की खेती के बाद अन्य फसल भी समय रहते की जा सकती है.

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